Saturday, October 3, 2020

सषक्त संगठन

 सषक्त संगठन

क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की दिषा में बिम्सटेक एक सषक्त माध्यम सिद्ध हो रहा है। भारत के पूर्व राजदूत अनिल वाधवा आकलन कर रहे हैं कि 2019 इस संगठन के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है।

बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग उपक्रम बिम्सटेक एक ऐसा संगठन है जो बांग्लादेष भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, भूटान एवं नेपाल को एक मंच पर लाने में सफल रहा है। यह क्षेत्रीय संगठन दक्षिण एवं दक्षिणपूर्व एषिया के बीच सेतु का काम कर रहा है। इस संगठन का ध्येय क्षेत्रीय संसाधनों और भौगोलिक लाभों का उपयोग करके वैष्विकरण के प्रभावों को कम करके सदस्य देषों की क्षमता को बढ़ाना है। बिम्सटेक गत दो दषकों से सक्रिय रूप से क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने का काम कर रहा है। वास्तव में, अगस्त    2014 से ही ढाका में इस संगठन का स्थाई सचिवालय कार्यरत है। बिम्सटेक को सार्क के विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है जिसमें पिछले अनेक वर्शों से गतिरोध देखने को मिल रहे हैं। 

बिम्सटेक सेक्टर-आधारित संगठन है, जिसमें 2008 तक 15 सेक्टरों को सम्मिलित किया गया था। व्यापार एवं निवेष चिकित्सकीय तथा बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा देना, तकनीक, ऊर्जा, परिवहन और संचार, पर्यटन, मछली पालन, कृशि, सार्वजनिक स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, आतंकवाद व अंतरराश्टन्न्ीय अपराध का सामना, पर्यावरण तथा आपदा प्रबंधन, सांस्कृतिक सहयोग, विभिन्न देषों के नागरिकों का मेल-मिलाप एवं पर्यावरण में बदलाव जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने का काम किया गया। बिम्सटेक के नए चार्टर पर कार्य आरंभ हो गया है। यह 1997 के बैंकाॅक घोशणापत्र पर आधारित है। वर्श 2016 में ही इस संगठन के चार सम्मेलन तथा नेताओं की बैठकें आयोजित किए गए। इन सभी आयोजनों के कारण वर्श 2019 इस संगठन के लिए बहुत अहम सिद्ध होगा। इस संगठन का चैथा सम्मेलन अगस्त 2018 में सम्पन्न हुआ था। इसमें कुछ महŸवपूर्ण निर्णय लिए गए थे। इस बैठक में निर्णय लिया गया कि स्थाई कार्यसमिति का गठन किया जाएगा जो समय-समय पर होने वाली बैठकों के संबंध में दिषा-निर्देष तथा प्रक्रिया के नियम जारी करेगी। सचिवालय ने बहुत ध्यान आकर्शित किया है। उसने वादा किया है कि वह सदस्य देषों को अधिक आर्थिक मदद व श्रमबल मुहैया कराएगा। साथ ही आपसी सहयोग, निगरानी एवं संगठन की गतिविधियों को लागू करने का काम करेगा। सदस्य देष थाईलैंड से मिले प्रस्ताव पर भी विचार कर रहे हैं जिसमें पांच प्रमुख क्षेत्रांे जैसे संचार, व्यापार एवं निवेष, लोगों का आपसी सहयोग, सुरक्षा, विज्ञान एवं तकनीक पर विषेश ध्यान देने की बात कही गई है। इससे संगठन को ही लाभ मिलने की बात कही गई है।

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी अगस्त 2008 को नेपाल की राजधानी काठमांडो में आयोजित बिम्सटेक के चैथे सम्मेलन में भाशण देते हुए

यद्यपि अंतिम सम्मेलन में समझौता-पत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसमें सदस्य देषों ने गत 14 वर्शों में किए गए मुक्त व्यापार संधि पर विचार किया गया। साथ ही, बिम्सटेक ऊर्जा केंद्र स्थापित करने की भी बात कही गई। 2009 में इस संबंध में एक करार किया गया था। मोटर व्हीकल संधि एवं कोस्टल षिपिंग संधि पर विचार-विमर्ष किया जा रहा है। आपसी संपर्कता के लिए ये दोनों ही संधियां बेहद आवष्यक हैं। आपसी सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिषा में इस संगठन ने बहुत अच्छा कार्य किया है। राश्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों एवं सेनाध्यक्षों की वार्शिक बैठकें आयोजित की गईं तथा भविश्य में भी सदस्य देषों के गृह मंत्रियों की बैठकें भी होंगी। भविश्य में आपसी कारोबार एवं आर्थिक मंचों के पुनरोद्धार, विष्वविद्यालयों, सांस्कृतिक संगठनों, मीडिया एवं सांसदों की बैठकें आयोजित करने की योजना है। बंगाल की खाड़ी के आसपास बसने वाले देष, जो इस संगठन के सदस्य हैं, उनके बड़े विषेश आर्थिक क्षेत्र हैं तथा अपनी सुरक्षा के लिए अपेक्षाकृत कमज़ोर नौसैनिक क्षमता है। इस विषेश क्षेत्र में भारत जैसे देष समुद्री जागरूकता बढ़ाने का नेतृत्व कर सकते हैं। अगर नौ सैनिकों अथवा तट रक्षकों की क्षमता का दोहना करना पड़े तो सरलता से किया जा सकता है। 

इसी दिषा में क्षेत्रीय सूचना साझा केंद्र आईएससी तथा सिंगापुर में सूचना साझा केंद्र स्थापित करने की बात कही गई है। आतंकवाद की रोकथाम, हिंसक अतिवाद एवं कट्टरवाद का सामना करने के लिए आपसी सहयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है। सुरक्षा के पारंपरिक एवं गैर-पारंपरिक ख़तरों का सामना करने के लिए व्यापक तरीके से निपटने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। बिम्सटेक परिवहन, आधारभूत सुविधाओं एवं रसद अध्ययन बीटीआईएलएस 2000 के मध्य के वर्शों में किया गया था। इसे एषियाई विकास बैंक द्वारा आर्थिक मदद दी गई थी। 160 परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर बल दिया गया, जिनमें से 65 को वरियता प्रदान की गई थी। त्रिपक्षीय राजमार्ग, कलादान बहुपक्षीय परियोजना एवं बांग्लादेष, भूटान, भारत एवं नेपाल मोटर व्हीकल संधि कुछ प्रमुख परियोजनाएं हैं। इनमें से कुछ समाप्ति की ओर हैं, जबकि कुछ के सामने अब भी अनेक चुनौतियां विद्यमान हैं। आपसी कारोबार को बढ़ावा देने, पर्यटन एवं निवेष, ऊर्जा की मांग को समकालीन बनाने एवं सहयोग के लिए बिम्सटेक देषों ने विचार किया कि उन्हें आपसी सहयोग बढ़ाना चाहिए। यह आपसी सहयोग ज़मीन, समुद्र एवं हवाई मार्ग द्वारा, डिजिटल संपर्कता तथा लोगों का लोगों से संपर्क बढ़ाने की बात कही गई है। बौद्ध पर्यटक स्थलों की संपर्कता बढ़ाने के लिए सीमाओं पर सांस्कृतिक संभाग स्थापित करने, सांस्कृतिक कला षैलियों तथा सिनेमा द्वारा इन संपर्कों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। समुद्र आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य जैसे साधनों के विकास पर बल दिया गया है। साथ ही भूटान जैसे देष में, पहाड़ी क्षेत्रों में वनों से मिलने वाले संसाधनों के भी विकास की बात कही गई है।

अगस्त 2008 को नेपाल की राजधानी काठमांडो में आयोजित बिम्सटेक के चैथे सम्मेलन में अन्य सदस्य देषों के नेताओं के साथ भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने की दिषा में सदस्य देषों ने इच्छा जताई कि व्यापार सुविधा कदमों पर विषेश ध्यान दिया जाए। हर एक देष के तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया जाए। दक्षिण एवं दक्षिणपूर्वी एषिया में क्षेत्रीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक पार्कों को स्थापित करने की बात कही गई। सदस्य देषों को इन पार्कों के माध्यम से निवेष में मदद मिलेगी। समुद्र आधारित कारोबार एवं तटीय परिवहन को सुचारू करने के लिए यह संगठन कारगर सिद्ध होगा। भारत अपने पूर्वोŸार राज्यों के विकास पर बल देगा तथा अन्य क्षेत्रों से इसका संपर्क बढ़ाएगा। परिवहन के बहु-पक्षीय प्रकारों पर बल दिया जाएगा। तटों एवं सीमाओं पर आर्थिक संभागों की स्थापना की जाएगी। भारत को त्रिपक्षीय राजमार्ग का निर्माणकार्य पूरा करने को कहा गया जो भारत को वाया म्यांमार से थाईलैंड तक जोड़ेगा। कलादान मल्टीमाॅडल परियोजना को पूरा करने की भी बात कही गई, जिसमें जल्द-से-जल्द भारत के पूर्वोŸार राज्यों को म्यांमार से जोड़ा जाएगा। 

सदस्य देषों के बीच ऊर्जा कारोबार बढ़ाने, बिम्सटेक ऊर्जा ग्रिड स्थापित करने, अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने, पनबिजली क्षमता बढ़ाने पर बल दिया गया है तथा म्यांमार एवं बांग्लादेष जैसे देषों में उपलब्ध गैस व पेट्रोलियम का उपयोग की बात कही गई। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने काठमांडो में कहा था कि दक्षिण एषिया में क्षेत्रीय एकता को ‘‘सार्क या फ़िर अन्य संगठन के माध्यम से बढ़ाया जाना चाहिए, जिसमें हम सभी अथवा हममें से कुछ हों’’ - बिम्सटेक इस दिषा में सदस्य देषों में नए आयाम खोलेगी। इस संगठन में भारत का प्रमुख योगदान रहा है। सदस्य देषों में नवषक्ति संचार के लिए भारत और अधिक ध्यान देगा। भारत एक दूसरे के बीच राजनीति विष्वास की बहाली करेगा। आर्थिक संसाधनों का सदुपयोग किया जाएगा। एक दूसरे के बीच कारोबार को बढ़ाया जाएगा। एक दूसरे के समाज का कल्याण किया जाएगा। इस संगठन के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग में नवऊर्जा प्रसारित की जाएगी।

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