Tuesday, September 8, 2020

What is Electronic Media Advertising

 


इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का बढ़ता ग्लैमर नई उम्र के लोगों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस वक्त देश में 50 से ज्यादा चैनल चल रहे हैं, जिनमें न्यूज और मनोरंजन दोनों ही चैनल शामिल हैं। कई विदेशी चैनलों के दफ्तर भी भारत में हैं। इन सभी में युवाओं के लिए अच्छी संभावनाएं हैं।

मीडिया उद्योग आज देश में सबसे तेजी से विकसित होते क्षेत्रों में से एक है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में होने वाले त्वरित विस्तार ने तो लोगों को अचंभित कर दिया है। पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के नाम पर जहां दूरदर्शन और आकाशवाणी जैसे सरकारी संस्थान ही मौजूद थे, वहीं आज निजी चैनलों की भरमार है। सरकार द्वारा प्रसारित होने वाले रेडियो और टेलीविजन चैनलों में भी भारी बढ़ोत्तरी हुई है। दूरदर्शन आज कई क्षेत्रीय चैनलों के अलावा न्यूज, स्पोर्ट्स तथा इंटरटेनमेंट  के लिए अलग-अलग चैनल संचालित कर रहा है। टीवी चैनलों के अलावा एफएम क्रांति ने एक बार फिर से रेडियो को लोकप्रिय बना दिया है। आकाशवाणी के एफएम स्टेशनों के साथ बड़ी संख्या में निजी एफएम चैनल भी खुल रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का बढ़ता ग्लैमर नई उम्र के लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करता है। युवाओं के मन में फलां रिपोर्टर या फलां एंकर जैसा बनने की चाह होती है। इस चाह को हकीकत का रूप देने के लिए उत्साह ही काफी नहीं। जरूरत है सही समय पर सही निर्णय लेने की। बारहवीं के बाद अपनी संवाद क्षमता में बढ़ोत्तरी के साथ ऐसे अध्ययन क्षेत्र का चुनाव करें जिससे मीडिया में प्रवेश का रास्ता खुले।

लोगों में प्राय: यह भ्रांति होती है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सिर्फ एंकर और रिपोर्टर काम करते हैं। लेकिन यह सच नहीं है। इनके अलावा भी ऐसे अनेक लोग काम करते हैं जिन तक सामान्य लोगों की पहुंच नहीं होती। ये लोग पर्दे के पीछे काम करते हुए प्रसारण की पूरी प्रक्रिया को सफल बनाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम पर्दे के आगे भी है और इसके पीछे भी। लेकिन ऐसा क्या करें कि इस क्षेत्र में प्रवेश का रास्ता खुले? यह एक अहम सवाल है। इस विषय में इयान स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन के डायरेक्टर अनुज गर्ग कहते हैं, छात्रों को शुरू से ही इस विषय में योजना बनानी चाहिए। बारहवीं के बाद जर्नलिज्म या मास कम्यूनिकेशन पाठयक्रम उपयोगी हो सकते हैं। इसके अलावा पढ़ाई के साथ-साथ कई वर्कशॉप तथा ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में भी हिस्सा लिया जा सकता है।

कार्य : इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कामों को दो भागों में बांटा जा सकता है- ऑन स्क्रीन और ऑफ स्क्रीन। ऑन स्क्रीन के तहत एंकर और रिपोर्टर का काम होता है। वैसे रिपोर्टर स्टोरी प्लानिंग, लाइन-अप और स्क्रिप्ट राइटिंग जैसे ऑफ स्क्रीन काम भी करता है। एडिटिंग में भी वह सहयोगी की भूमिका निभाता है। ऑफ स्क्रीन कामों को दो भागों में बांट सकते हैं। एक एडिटोरियल विभाग, दूसरा टेक्निकल विभाग। असल में किसी भी चैनल की रीढ़ ये दोनों ही विभाग होते हैं। खबरों की पैकेजिंग और अंतिम रूप से प्रसारण में इन्हीं की प्रमुख भूमिका होती है।

एडिटोरियल विभाग : इस विभाग के तहत अगर आप किसी न्यूज चैनल में काम करते हैं तो आप स्क्रिप्ट राइटर, रनडाउन प्रोडयूसर, असिस्टेंट प्रोडयूसर, प्रोडयूसर, करेंट एडिटर, आउटपुट एडिटर इत्यादि की भूमिका में होते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप दृश्यों को विजुअलाइज कर सकें। आपकी भाषा तथा स्क्रिप्ट लिखने की क्षमता अच्छी हो, एडिटोरियल की समझ हो और आपने जर्नलिज्म या मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा या डिग्री कोर्स किया हो।

टेक्निकल विभाग : इसमें मुख्यतौर पर कैमरामैन,लाइटमैन, ग्राफिक्स डिजाइनर, स्टूडियो डायरेक्टर, स्विचर, साउंड इंजीनियर, फ्लोर मैनेजर, प्रोडक्शन असिस्टेंट, प्रोडक्शन मैनेजर, वीडियो टेप एडिटर आदि पदों पर काम कर सकते हैं। इसके लिए आप कैमरा, एडिटिंग, साउंड इंजीनियर, ग्राफिक्स डिजाइनर और एनिमेशन का कोर्स कर सकते हैं। वैसे तो आपको सभी काम चैनल में ही जाकर सीखना होता है और वहां जाकर कोई भी काम करना पड़ सकता है।

अन्य क्षेत्र : इसके अलावा आप चाहें तो किसी चैनल पर वीजे (वीडियो जॉकी) और आरजे यानी रेडियो जॉकी तथा वीओ आर्टिस्ट बन सकते हैं। इसके लिए आपकी आवाज अच्छी होनी चाहिए। पे्रजेंटेशन और कम्यूनिकेशन पर आपकी अच्छी पकड़ होना बेहद जरूरी है। अगर आप कुछ क्रिएटिव करना चाहते हैं तो इसी क्षेत्र में आपके पास दूसरे विकल्प भी हैं। मसलन आप डाक्यूमेंटरी बनाइये या एक खूबसूरत ऐड फिल्म भी बना सकते हैं। आपके पास ऑनलाइन सेक्टर में भी काम करने के विकल्प खुले हैं। इस विषय में टेक वन स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन के डायरेक्टर इमरान जाहिद कहते हैं कि ज्यादातर छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की पूरी जानकारी नहीं होती है। वे टीवी एंकरिंग तथा रिपोर्टिग को ही सब कुछ समझते हैं लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अन्य ढेरों विकल्प मौजूद हैं। वीडियो प्रोडक्शन, प्रोग्राम प्रोडक्शन, टीवी सीरियल इत्यादि में तो स्क्रिप्ट राइटर से एडिटर तक हर तरह के प्रोफेशनल की भारी मांग है।

पाठयक्रम
अधिकतर विश्वविद्यालयों में जर्नलिज्म या मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन पाठयक्रम उपलब्ध हैं। इनमें किसी भी स्ट्रीम से 10+2 करने वाले छात्र प्रवेश ले सकते हैं। इसके बाद अध्यापन या शोध में रुचि हो तो पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया जा सकता है। कुछ संस्थानों द्वारा डिप्लोमा कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं।
इलेक्ट्रानिक मीडिया का क्षेत्र पूरी तरह प्रयोगिक अनुभव पर आधारित है। किसी पाठयक्रम में एडमीशन से पूर्व उसके प्रायोगिक पक्ष की जांच जरूर करनी चाहिए। इयान स्कूल के डायरेक्टर अनुज गर्ग कहते हैं कि कुछ विश्वविद्यालयों के पाठयक्रम केवल थ्योरी पर आधारित है। काफी समय से उनमें बदलाव भी नहीं हुआ। ऐसे में पाठयक्रम के चयन से पूर्व छात्र को इसकी उपयोगिता के बारे में पूरी तरह आश्वस्त होना चाहिए।

संभावनाएं
यकीनन आज यह क्षेत्र नौकरियों से भरपूर है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यदि बॉलीवुड को छोड़ दें तो 50 से ज्यादा चैनल इस वक्त देश में चल रहे हैं, जिनमें न्यूज और मनोरंजन दोनों ही चैनल शामिल हैं। इसके अलावा कई विदेशी चैनलों के दफ्तर भी भारत में हैं। इन सभी में युवाओं के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। जाने माने पत्रकार एवं इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन में असिस्टेंट प्रोफेसर आनंद प्रधान के अनुसार आज इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अवसर तो बहुत है लेकिन इनका लाभ उठाने के लिए अपने अंदर जर्नलिस्ट एप्रोच विकसित करना बेहद जरूरी है। आप में देश-दुनिया के विषय में राजनैतिक समझदारी होनी चाहिए। अंग्रेजी तथा हिंदी भाषा के ज्ञान के साथ आप में लिखने और बोलने की बेहतर क्षमता होनी चाहिए। इस क्षेत्र में आने के लिए तकनीकी जानकारी के साथ इनका विकास बेहद जरूरी है। न्यूज चैनलों के अलावा आप प्रोडक्शन हाउस, ऐड एजेंसीज, रेडियो, सरकार के विज्ञापन और प्रचार-प्रसार विभाग तथा विभिन्न एनजीओ में भी काम कर सकते हैं।

संस्थान
फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीटयूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) लॉ कालेज रोड, पुणे, फोन: 020-25431817, वेबसाइट : www.ftiiindia.com
कोर्स : डिप्लोमा एंड ग्राफिक्स
जागरण इंस्टीटयूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन एफ-33, सेक्टर-6, नोएडा, फोन : 0120-3950369, वेबसाइट : www.pixelgaloxystudio. com
कोर्स : डिप्लोमा इन वीडियो एडीटिंग
इयान स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन, इयान हाउस, सी-766 के सामने, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, नई दिल्ली-65, फोन : 55671032/33 वेबसाइट : www.iaan.org 
कोर्स : बैचलर इन जर्नलिज्म, बीएससी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, बीजे (1 वर्षीय), एमए इन मास कम्यूनिकेशन
गवर्नमेंट फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीटयूट, हैसरघाटा, बंगलूर, फोन : 080-28466768,वेबसाइट : www.dte.kar.nic.in
कोर्स : डिप्लोमा इन सिनेमैटोग्राफी, डिप्लोमा इन साउंड रिकॉर्डिग
भारतीय विद्या भवन, केजी मार्ग, नई दिल्ली फोन : 011-23389449, वेबसाइट : www.film-tvstudies.com
कोर्स – पीजी डिप्लोमा इन रेडियो एंड  टीवी प्रोडक्शन, वीडियो कैमरा, एडीटिंग, साउंड रिकॉर्डिग, डिप्लोमा इन वीडियो ग्राफिक्स
टेक वन स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन एस-78, ग्रेटर कैलाश, पार्ट-1, नई दिल्ली फोन: 55288746-48,  वेबसाइट : www. takeon eschool.com 
कोर्स : बैचलर इन जर्नलिज्म, मास्टर इन मास कम्यूनिकेशन
माया एकेडमी ऑफ एडवरटाइजिंग एंड सिनेमेटिक्स, ई-19, साउथ एक्सटेंशन पार्ट -2, दिल्ली, फोन : 011-24653026, वेबसाइट : www.mayanet.com
कोर्स : डिप्लोमा एडीटिंग एंड रिकार्डिगएएएफटी, मारवाह स्टूडियो, सेक्टर 16, फिल्म सिटी, नोएडा फोन : 0120-25364523, वेबसाइट : www.aaft.com
कोर्स : शाटटर्म कोर्सेज – एडिटिंग एंड साउंड रिकॉर्डिग, प्रोडक्शन, कैमरा लाइटिंग एंड ग्राफिक्स एनीमेंशन
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल फोन : 0755-272559, वेबसाइट : www.mcrp.org.in
नोएडा सेंटर-डी-12ए, सेक्टर-20, नोएडा-फोन-0120-25324225
कोर्स : बीजे, एमए. ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म


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